Tuesday, November 13, 2018

ख्वाकीन अल चैपो गूसमैन: ड्रग्स तस्करी की दुनिया का 'गॉडफ़ादर' जो ख़ौफ़ का दूसरा नाम है

न्यूयॉर्क में मेक्सिको के ड्रग तस्कर ख्वाकीन अल चैपो गूसमैन पर मुक़दमा बेहद कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हो रहा है.
अति सुरक्षित जेल से एक सुरंग के ज़रिए फ़रार होने के पांच महीने बाद जनवरी 2016 में गज़मैन को फिर से गिरफ़्तार किया गया था.
अभियोजकों का कहना है कि अमरीका में ड्रग्स की सर्वाधिक सप्लाई करने वाले सिनालोआ ड्रग कार्टेल के पीछे गूसमैन का ही दिमाग़ है.
माना जा रहा है कि उनके एक क़रीबी पूर्व सहयोगी के अलावा कई और लोग उनके ख़िलाफ़ अदालत में गवाही देंगे.
ख़्वाकीन गूसमैन का जन्म 1957 में एक किसान परिवार में हुआ था. वो अफ़ीम और गांजे की खेतों पर काम करते थे और यहीं से उन्होंने ड्रग तस्करी के गुर सीखे.
इसके बाद वो 'द गॉडफ़ादर' के नाम से चर्चित और शक्तिशाली ग्वाडालाजारा कार्टेल के प्रमुख मिगेल एंजेल फ़ेलिक्स गैलार्डो के चेले बने और तस्करी की बारीकियां सीखीं.
5 फ़ुट 6 इंट लंबे गूसमैन को शॉर्टी भी कहा जाता है. वो 1980 के दशक में उत्तर-पश्चिमी मेक्सिको में प्रभावशाली सिनालोआ कार्टेल के शीर्ष तक पहुंच गए.
ये अमरीका को ड्रग तस्करी करने वाला सबसे बड़ा समूह बन गया और साल 2009 में फ़ोर्ब्स पत्रिका ने दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में 701वें नंबर पर गज़मैन को शामिल किया. उस समय उनकी कुल संपत्तियां क़रीब एक अरब डॉलर की थीं.
साल 1993 में एक प्रतिद्वंदी गैंग ने उन पर हमला किया था, लेकिन वो इसमें बाल-बाल बच गए थे. हालांकि इसी साल उन्हें एक व्यापक अभियान के बाद ग्वाटेमाला से गिरफ़्तार किया गया था.
इस दौरान वो अति सुरक्षा वाली जेलों में रहे. साल 2001 में एक सुरक्षागार्ड की मदद से वो जेल से फ़रार हो गए. गूसमैन को दोबारा पकड़ने के लिए कई देशों में अभियान चलते रहे, लेकिन वो साल 2014 तक फ़रार रहे. फ़रवरी 2014 में उन्हें फ़िर से गिरफ़्तार कर लिया गया.
वो एक बार फिर जेल से फ़रार हुए, लेकिन जनवरी 2016 में दोबारा गिरफ़्तार कर लिए गए और उन्हें अमरीका प्रत्यर्पित कर दिया गया.
उन्हें अल रैपिडो, शॉर्टी, एल सेनोर, एल येफ़े, नाना, आपा, पापा और इंगे के उपनामों से भी जाना जाता है.
सिनालोआ मेक्सिको का एक उत्तर-पश्चिमी प्रांत है और इसी पर सिनालोआ कार्टेल का नाम पड़ा है. गूसमैन के आदेश पर इस कार्टेल ने कई प्रतिद्वंदी ड्रग तस्करी समूहों का सफ़ाया किया और अमरीका को ड्रग भेजने वाला सबसे बड़ा नेटवर्क बन गया.
अमरीकी कांग्रेस में जुलाई 2018 में पेश की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक ये कार्टेल सालाना तीन अरब डॉलर तक कमाई करता है. अमरीका में चल रहे मुक़दमे के मुताबिक ये इस समय दुनिया में ड्रग तस्करी करने वाला सबसे बड़ा समूह है.
रिपोर्ट के मुताबिक इस गैंग का प्रभाव कम से कम पचास देशों में है. हालांकि हाल के वर्षों में इस कार्टेल को कई प्रतिद्वंदी गैंगों से चुनौती भी मिली है और सवाल उठा है कि क्या अब कार्टेल का प्रभाव कम हो रहा है.

Friday, October 12, 2018

आख़िर रफ़ायल पर कौन सच बोल रहा है?

रांस की कंपनी डासो एविएशन के रफ़ायल लड़ाकू विमान को लेकर भारत में विवाद गर्म हो गया है.
शुक्रवार कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान कहा कि मोदी सरकार ने 36 रफ़ायल लड़ाकू विमान की ख़रीदारी में भ्रष्टाचार को अंजाम दिया है.
राहुल का कहना है कि सरकार इस सौदे की क़ीमत बताने से बच रही है जबकि सरकार का कहना है कि दोनों देशों के बीच हुए समझौते में गोपनीयता की शर्त के कारण वो क़ीमत को सार्वजनिक नहीं कर रही है.
क्या फ़्रांस के साथ हुए सौदे की क़ीमत इस क़दर गोपनीय है कि सार्जनिक नहीं की जा सकती? राहुल गांधी ने तो यहां तक कह दिया कि उनकी फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बात हुई थी और उन्होंने कहा कि इस समझौते में गोपनीयता जैसी कोई बात नहीं है. आख़िर रफ़ायल पर झूठ कौन बोल रहा है?
10 अप्रैल, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 36 रफ़ायल लड़ाकू विमान ख़रीदने की घोषणा की थी. फ़ाइनैंशियल टाइम्सफ़ायल की क़ीमत को लेकर भारतीय मीडिया में विपक्ष की तरफ़ से समय-समय पर सवाल उठाए जाते रहे हैं. पहले की तुलना में ज़्यादा क़ीमत पर सरकार का कहना है कि डासो ने भारत में 108 फ़ाइटर जेट तैयार करने का वादा किया है.
इन लड़ाकू विमानों को भारत में बनाने के लिए पहले सरकारी कंपनी हिन्दुस्तान एयरोनौटिक्स लिमिटेड को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था. यह काम उसे डासो के साथ मिलकर करना था, लेकिन बाद में इस कॉन्ट्रैक्ट को रिलायंस डिफेंस को दे दिया गया.
डासो एविएशन की वार्षिक रिपोर्ट
23 सिंतबर, 2016 को डासो एविएशन ने भारत के साथ राफ़यल सौदे को लेकर एक प्रेस रिलीज
इस सौदे की शर्तों पर दोनों देश चुप हैं. फाइनैंशियल टाइम्स से फ़्रांस के अधिकारियों ने कहा है कि यह एक गोपनीय सौदा है, इसलिए कोई जानकारी मुहैया नहीं कराई जाएगी. भारतीय वायु सेना की वर्षों से सक्षम लड़ाकू विमान मुहैया कराने की मांग रही है.
एविएशन वीक की एक रिपोर्ट के अनुसार पहला रफ़ायल भारत के पास 2019 के आख़िर में आएगा और बाक़ी के 35 रफ़ायल 60 महीनों के भीतर आ जाएंगे. इनमें से 28 सिंगल सीट एयरक्राफ़्ट हैं जबकि 8 दो सीटों वाले हैं.
रफ़ायल को आधिकारिक रूप से परमाणु हथियारों से लैस नहीं किया गया है. ऐसा अंतरराष्ट्रीय संधियों के कारण किया गया है. हालांकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि भारत मिराज 2000 की तरह इसे भी अपने हिसाब से विकसित कर लेगा.
जारी किया. इसमें लिखा गया है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अप्रैल 2015 में फ़्रांस के दौरे पर आए थे और उन्होंने इस सौदे को अंतिम रूप दिया.
हालांकि प्रेस रिलीज में इस बात का ज़िक्र कहीं नहीं है कि यह सौदा कितने का है. इसके साथ ही इस प्रेस रिलीज में इस बात का भी उल्लेख नहीं है कि यह गोपनीय सौदा है और इससे जुड़ी जानकारियों को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा.
2016 में कहा गया है कि 31 दिसंबर 2016 तक 20 करोड़ तीन लाख 23 हज़ार यूरो के रफ़ायल लड़ाकू विमान के पुराने ऑर्डर थे जबकि 31 दिसंबर, 2015 तक 14 करोड़ एक लाख 75 हज़ार यूरो के ही ऑर्डर थे.
अख़बार से डासो कंपनी के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने फ़ोन पर कहा था कि इस सौदे दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ेगा.

Thursday, October 4, 2018

रोहिग्या शरणार्थियों को वापस भेजने पर रोक से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार

सरकार की तरफ से पेश हुए सीनियर कानूनी अधिकारी तुषार मेहता ने कोर्ट से बताया कि म्यांमार सरकार ने इस बात को माना है कि वे उनके नागरिक हैं और उनको पहचान के लिए सार्टिफिकेट दिए हैं ताकि उनकी वापसी हो सके।
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस के कौल तथा न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने यह आदेश दिया। 
गौरतलब है कि न्यायालय में बुधवार को एक याचिका दाखिल कर केंद्र को असम के सिलचर में हिरासत केंद्र में बंद सात रोहिंग्याओं को म्यामां भेजने से रोकने का अनुरोध किया गया था। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बुधवार को कहा था कि रोहिंग्या प्रवासियों को गुरुवार को मणिपुर में मोरे सीमा चौकी पर म्यामां अधिकारियों को सौंपा जाएगा। 
सात रोहिंग्याओं के प्रस्तावित निर्वासन को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने के अनुरोध वाली यह अंतरिम याचिका पहले से ही लंबित जनहित याचिका में दाखिल की गई।
दो रोहिंग्या प्रवासी मोहम्मद सलीमुल्लाह और मोहम्मद शाकिर ने पहले जनहित याचिका दायर की थी। उन्होंने रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ बड़े पैमाने पर भेदभाव और हिंसा के कारण म्यामां से भागकर भारत आने वाले 40,000 शरणार्थियों को उनके देश भेजने के केंद्र के फैसले को चुनौती दी थी।
असम के हिरासत शिविर में करीब 32 रोहिंग्या शरणार्थी है। इनमें से नाबालिग समेत करीब 15 रोंहिग्या शरणार्थी तेजपुर में हैं। ऐसा माना जा रहा है कि इनमें से ज्यादातर म्यांमार के रखाइन राज्य के हैं जिन्हें साल 2014 में रेलवे पुलिस ने पकड़ा था।
भारत में करीब 40 हजार रोहिंग्या
पिछले कई वर्षों से हजारों की संख्या में म्यांमार के पश्चिमी तटवर्ती इलाके रखाइन में रहनेवाले रोहिंग्या मुसलमान पुलिस और कट्टरपंथी रोहिंग्या के बीच छिड़ी खूनी लड़ाई के चलते वहां से भागने के मजबूर हुए। ज्यादातर ये रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश गए लेकिन उनमें कुछ सीमा पार कर भारत आ गए। भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान ऐसा मानते हैं कि भारत में ऐसे शरणार्थियों की संख्या करीब 40 हजार है।
सुप्रीम कोर्ट ने महज कुछ घंटों बाद मणिपुर से रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस म्यांमार भेजे पर रोक लगाने से गुरुवार को साफ इनकार कर दिया। भारत की तरफ से आधिकारिक तौर पर म्यांमार प्रत्यर्पण का यह पहला मामला है।
वकील प्रशांत भूषण ने इस में सुप्रीम कोर्ट से दखल देने की मांग की थी और कहा था कि यह अदालत का कर्तव्य है कि वह राज्य विहीन रोहिंग्या शरणार्थियों की रक्षा करे।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने प्रशांत भूषण से कहा कि उन्हें इस बात को याद दिलाने की कोई आवश्यता नहीं है कि जजों की क्या जिम्मेदारियां हैं। गृह मंत्रालय ने हलफनामा दायर कर कहा था कि सात रोहिंग्या अपनी सजा पूरी करने के बाद वापस म्यांमार जाने को तैयार हैं। अवैध प्रवासी थे और उन्हें फॉरनर्स एक्ट में दोषी पाया गया था।

Sunday, September 30, 2018

बेघर हुए रोमिल ने 'रोडीज' की फेम सुरभि के संग मारी एंट्री, उड़ा घरवालों के चेहरे का रंग

जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के लिए दक्षिण कोरिया में सोमवार को संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण बैठक को लेकर दुनिया भर के देश जुटेंगे। न्यूज एजेंसी भाषा के अनुसार, हालात से निपटने के लिए लगातार कम होते विकल्प के बारे में 6000 से ज्यादा वैज्ञानिकों के अध्ययन से संबंधित 20 पन्ने के एक समझौते की समीक्षा की जाएगी और इसे मंजूरी दी जाएगी। वर्ष 2015 में पेरिस समझौते पर 195 देशों ने दस्तखत किए थे। उस वक्त संयुक्त राष्ट्र के वैज्ञानिकों ने तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने की संभावना पर गौर करने का अनुरोध किया था।
आखिरकार, समझौते के तहत सभी देशों ने विश्व के औसत तापमान में वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने का लक्ष्य रखा था। उसके बाद से प्रचंड गर्मी, बाढ़, दावानल और तूफानी चक्रवात, समुद्र के बढ़ते स्तर ने वैज्ञानिकों को यह मानने पर मजबूर कर दिया कि इस पर फिर से विचार की जरूरत है। अब तक तापमान में एक डिग्री से थोड़ा कम का इजाफा हो चुका है। वाशिंगटन स्थित शोध संगठन यूनियन ऑफ कन्सर्न्ड साइंटिस्ट में विज्ञान और नीति के निदेशक पीटर फ्रमहॉफ ने कहा कि बहुत सारे ऐसे प्रमाण हैं जिससे पता चलता है कि खतरा बढ़ रहा है ।
नोबेल पुरस्कार प्रदान करने वाली संस्था स्वीडिश एकेडमी ने इस साल 'साहित्य का नोबेल पुरस्कार' स्थगित करने का फैसला किया है। वर्ष 1901 से शुरू हुए नोबेल पुरस्कार के 117 साल के इतिहास में यह दूसरा मौका है जब 'साहित्य का नोबेल पुरस्कार' को स्थगित किया गया है। इससे पहले 1943 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इसे स्थगित किया गया था। दरअसल, नोबेल पुरस्कार विजेताओं का चुनाव करने वाली संस्था स्वीडिश एकेडमी की ज्यूरी मेंबर कटरीना के पति और फ्रांसीसी फोटोग्राफर जेन क्लोड अरनॉल्टपर यौन शोषण के आरोप लगे हैं। जिसके बाद से स्वीडिश एकेडमी विवादों में घिरी है।
अब तक कुल 49 बार स्थगित हो चुका है नोबेल पुरस्कार 
ऐसा नहीं है कि सिर्फ 'साहित्य का नोबल पुरस्कार' को ही अब तक स्थगन का सामना करना पड़ा है। वर्ष 1901 में नोबेल पुरस्कार की स्थापना हुई थी और तब से लेकर अब तक कुल 49 बार ऐसा हुआ है, जब किन्ही कारणों से इस पुरस्कार के अलग-अलग कैटेगरीज (लिटरेचर, फिजिक्स, साइकॉल्जी या मेडिसिन, केमिस्ट्री, इकोनॉमिक साइंसेज) को स्थगित करना पड़ा हो। नोबेल पुरस्कार का स्थगन सबसे ज्यादा बार प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुआ है। आखिरी बार 1943 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इसको स्थगित किया गया था। भारत को सिर्फ एक बार साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला है। 1913 में रवींद्रनाथ टैगोर को गीतांजलि के लिए यह पुरस्कार दिया गया था।
ब्रिटेन की कंजर्वेटिव पार्टी के वरिष्ठ मंत्रियों के फोन नंबर और अन्य निजी जानकारियां लीक हो गई हैं। इनमें ब्रेग्जिट का समर्थन करने वाले शीर्ष नेता माइकल गोव और बोरिस जॉनसन भी शामिल हैं। ऐसा एक एप में आई सुरक्षा खामी के कारण हुआ। शीर्ष सांसदों के प्रोफाइल आधिकारिक मोबाइल एप पर लीक होने के बाद से उन्हें परेशान करने वाले फोन आ रहे हैं। इस सुरक्षा खामी के कारण लोग अपने ईमेल पते का इस्तेमाल कर नेताओं के प्रोफाइल देख और उसमें दी जानकारियां बदल पाए। कई टि्वटर यूजर्स के अनुसार, पूर्व विदेश मंत्री जॉनसन की प्रोफाइल पिक्चर थोड़ी देर के लिए पोर्नोग्राफी के लिए इस्तेमाल की गई और उनके कार्य क्षेत्र की जानकारी को भी बदल दिया गया।
इस बीच, पर्यावरण मंत्री गोव की तस्वीर को बदलकर उनकी जगह मीडिया टाइकून रूपर्ट मर्डोक की तस्वीर लगा दी गई। इस खामी के बारे में द गार्जियन अखबार के स्तंभकार डॉन फोस्टर ने सबसे पहले जानकारी दी। कंजर्वेटिव पार्टी के एक प्रवक्ता ने इस त्रुटि के लिए माफी मांगते हुए कहा कि तकनीकी खामी को सुधार लिया गया और एप अब सुरक्षित रूप से काम कर रही है। 
ऑस्ट्रेलिया की कंपनी ने बनाई एप 
ब्रिटेन की डाटा पर निगरानी रखने वाली संस्था इंफॉर्मेशन कमिशनर्स ऑफिस (आईसीओ) ने कहा कि वह एप एक ऑस्ट्रेलियाई कंपनी ने बनाई है। एप से संबंधित खामी की जांच की जा रही है। विपक्षी लेबर पार्टी ने कहा कि यह बड़ी गलती दिखाती है कि सुरक्षा के मामलों में सत्तारूढ़ पार्टी पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

Monday, September 24, 2018

夏季极端天气肆虐全球

由于世界各地破纪录的热浪和其他极端天气事件,今年夏天将被我们铭记。对某些人来说,这个时刻让他们真正相信极热天气将更加常见,会成为他们未来的一部分,因为他们亲眼目睹炎热的天气直接或间接地造成数以千计的死亡。

极端之夏

在中国,弥漫全球的热浪打破了北京的记录,达到了39摄氏度,是50年来的最高纪录。与此同时,7月22日以来西北宁夏回族自治区的贺兰山地区连降暴雨,超过5200位当地居民被疏散。

本周,林火在希腊造成80多人死亡。今夏惊人的干旱将植被都变成了易燃的干柴,时速124公里的狂风大大助长了林火的气焰,使其“每分钟都在改变着方向”。

英国的夏季以多雨著称,但今年高温造成的火灾已经创造了消防部门的记录。7月,下议院环境审计委员会警告说:“如果政府不采取任何行动,到2050年每年英国将会有7000人死于炎热。”

气候变化是元凶吗?

东安格利亚大学的气候变化科学与政策教授科林·勒·克勒说:“有多项研究已经将人为气候变化与自然循环区分开来。这些研究表明,迄今世界很多地方发生热浪的风险因气候变化增加了一倍多。”气候学家们一直强调未来热浪将更加频繁、更加猛烈。

“我们知道,自前工业化时代以来地球的温度已经升高了1摄氏度左右;我们也知道,如果这些热量进入自然系统,热浪很可能会更加极端。”英国气象局发言人格雷厄姆·玛齐说。

但是,热浪不能简单地全怪气候变化,科学家们已经从气象学的角度对这些错综复杂的根源做出了解释。

卡迪夫大学的气候变化影响研究员玛丽·埃克斯罗姆将欧洲天气的变化归因于一股减弱的喷流,正是它影响了地表的天气。

她说:“如今伴随着我们的是一股非常弱的气流和一个中欧上空的高压系统。这个高压系统阻断了来自大西洋的各种天气系统,将其推向北方而不是让其向东朝着欧洲的方向移动。”

世界气象组织发言人克莱尔·纳里斯也把矛头指向洋流的暖化,“这是有记录以来最热的一个拉尼娜年”。

尽管都知道极热天气要来,但各国似乎并未做好准备。热浪愈演愈烈与人为气候变化的关系确信无疑。这早就被预测到了,而且预测结果正一一兑现。寒流的减少和降雨量增加也是一样。(国际气象组织的 )其他工作也在进行中。”—— 加文·施密特的推特

热浪的连锁效应

极热还会引发其他天气事件,如超级风暴、龙卷风、洪水和林火等。

世界资源研究所是一家致力于促进可持续发展的全球研究机构,它指出:“气候变化还造成海洋变暖,助长海岸风暴的力量。更麻烦的是,变暖的大气中会含有更多水汽,而风暴系统中水汽增加的结果就是降雨增加。”

这些预言正在成为现实。越南经历了一系列风暴,上个月的暴雨引发山洪和滑坡,造成24人死亡。本周热带风暴“山神”登陆,又有27人死亡。今夏印度有12个邦遭受洪灾,数千人死亡、5.5万座房屋被毁,8.1万公顷农田被淹。

中国南部地区的暴雨也引发严重洪水,长江及其支流因此泛滥,造成数十人死亡、数百万人疏散。

多米诺效应


极端天气带来了一连串相关压力,干旱、基础设施和耕地的损失,而当它们接连发生时,恢复系统就被彻底压垮了。

美国天气预报机构 的气象学家肯·克拉克说:“只要大火烧光大片土地,严重的风暴就会在过火区域和附近造成更多洪灾和泥石流。”

从6月底到7月中旬,日本已经有222人死于洪水和滑坡。在这之后,滔天热浪接踵而至,这场自然灾害造成30人死亡,阻碍了救援和恢复工作的进行。

今夏的极端天气表明了采取行动应对气候变化为何如此重要。

正如勒·克勒教授总结的那样:“把气候变化限制在2摄氏度以内,会大大减少热浪带来的变化。但是,业已出现的变化将持续数百年。”

比如,世界气象组织的保罗·鲁迪说,最近的天气形态与政府间气候变化专门委员会等机构预测的排放增长的气候影响高度一致。

Thursday, September 13, 2018

气候变化将导致史无前列的移民潮

二在伦敦举行的一会议对科学家和政治领袖们提出警告说,全球变暖可能会导致史无前例的大规模移民。从而,到2050年,多达10亿的人口将失去他们的家园。
 该会议声称,由于大多数非洲,中亚,南亚和南美国家的水资源缺乏和农作物种植衰败,几亿人口将被迫迁离他们的家园。
 海平面的上升也将会带来大的灾难。南亚,远东,南太平洋岛屿和加勒比海沿海将眼睁睁地看着他们的家园被淹没。
 联合国难民事务高级专员办事处发出警告说,发达国家应该开始为因气候变化而造成的大规模量人口流动做准备。 二在伦敦举行的一会议对科学家和政治领袖们提出警告说,全球变暖可能会导致史无前例的大规模移民。从而,到2050年,多达10亿的人口将失去他们的家园。
 该会议声称,由于大多数非洲,中亚,南亚和南美国家的水资源缺乏和农作物种植衰败,几亿人口将被迫迁离他们的家园。
 海平面的上升也将会带来大的灾难。南亚,远东,南太平洋岛屿和加勒比海沿海将眼睁睁地看着他们的家园被淹没。
 联合国难民事务高级专员办事处发出警告说,发达国家应该开始为因气候变化而造成的大规模量人口流动做准备。 位苏丹气候研究员日前受到联合国环境规划署的褒奖,表彰她在发生冲突的达尔富尔地区为气候变化及适应所做的工作。 据SciDev.net网站报道,苏丹环境与自然资源高等协调会的资深研究员巴尔基斯•奥斯曼•埃拉沙获得“2008地球卫士奖”。 奥斯曼•埃拉沙还是IPCC的领导成员。她的研究领域是达尔富尔地区居民如何应对干旱。

她的工作还包括扩大传统雨水收集与保存技术的使用。在苏丹,气候变化与达尔富尔冲突之间的关系已经引起了严重忧虑。她的工作就是在这个背景下开展起来的。

奥斯曼•埃拉沙说:“我们应该立即行动起来抑制气候变化。如果科学界、政府、企业和社会联合起来,共同应对紧迫的气候变化问题,我们能够抑制它。
据《卫报》周六报道,超市和产业以植物为基础的"生物塑料"取代传统油基塑料的做法也会对环境造成损害。
该报道说,生物塑料垃圾的填埋处理会增加甲烷的排放。甲烷比二氧化碳的温室效应要强很多倍。美国国家海洋和大气管理局上周说,去年全球甲烷排放量大幅增加

此外,有些生物塑料也不是如消费者认为的那样可降解
,而且需在高温下分解。许多生物塑料由玉米,甘蔗,小麦和其它作物制成,这就造成了大面积的以前用于种植口粮的土地的占用。这也是导致全球粮食危机产生的因素之一。

生物塑料市场占有率每年以20%至30%的速度增长 。
据《路透社》报道,预测说,美国中西部地区虽自1988年以来未曾发生严重干旱,但担心今年这个粮食产区将不会有那么好的运气。这将在食品价格飙升的情形下进一步使全球供应紧缩。
该报道引用爱荷华州气象学家Elwynn Taylor 的话说,今年这一玉米种植带有1/3干旱的可能性。"我们必须要有所准备,33%不是个小风险

地球政策研究所所长莱斯特·布朗说,世界粮食库存已处于历史上最
低水平。粮食的进一步短缺将加剧进口国对现有供给粮食的争夺
据中国官方媒体报道,一香港环保团体称,为满足8所政府资助的大学对纸张的需求,多达5,600棵树木已被砍伐。
香港慈善团体- 消费者力量- 对本地大学纸张的使用进行了调查,批评大学管理层和学生在保护环境方面做得不够,并敦促他们减少纸张使用数量。

该组织建议说,如果需使用纸,他们应使用百分百无氯再生纸。

在今年2月到4月间,该环保团体向8所大学发出问卷以了解他们的
环境政策和纸张的使

Monday, September 10, 2018

प्रेस रिव्यू: बढ़ते चालू खाता घाटे से शेयर बाज़ार हुआ धड़ाम

ख़बर के मुताबिक़ भारत के बढ़ते चालू खाता घाटे ने शेयर बाज़ार की हालत पस्त कर दी है.
सेंसेक्स और निफ्टी ने छह महीने में पहली बार एक दिन में सबसे ज़्यादा की गिरावट दर्ज की है.
रुपये की क़ीमत डॉलर के मुक़ाबले 72.67 हो गई और ये नई रिकॉर्ड गिरावट है.
निवेशकों का मानना है कि चुनावी साल में रुपए और चालू खाता घाटे की ये हालत अर्थव्यवस्था के लिए और दिक्क़तें पैदा कर सकती है.
निफ्टी कल 151 अंक नीचे आ गया और सेंसेक्स में 467.65 अंक की गिरावट आई. मार्च महीने के बाद ये सबसे बड़ी गिरावट है. में दी गई ख़बर के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार गन्ने की बकाया राशि का निपटान करने के लिए 5,535 करोड़ रुपये की मदद का पैकेज देगी.
गन्ना विकास मंत्री सुरेश राणा ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि अगले महीने में चीनी मिलों में पेराई शुरू होने से पहले किसानों को उनके गन्ने का पुराना 10, करोड़ रुपये का पूरा बकाया चुका दिया जाए.
उन्होंने कहा कि आने वाले हफ़्ते में सहकारी और निजी क्षेत्र की मिलों पर गन्ने की बकाया राशि का निपटान करने के लिए 5,535 करोड़ रुपये की मदद का पैकेज मंत्रिमंडल के समक्ष पेश किया जाएगा.
सुरेश राणा ने नेशनल फ़ेडरेशन ऑफ़ शुगर फ़ैक्टरीज़ लिमिटेड (एनएफएसएफएल) की वार्षिक आम बैठक के मौके पर ये बात कही.
उन्होंने बताया, "हमने 20 अक्टूबर से नए सत्र की शुरुआत से पहले बकाया राशि को शून्य करने का लक्ष्य रखा है."में दी गई ख़बर के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार गन्ने की बकाया राशि का निपटान करने के लिए 5,535 करोड़ रुपये की मदद का पैकेज देगी.
गन्ना विकास मंत्री सुरेश राणा ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि अगले महीने में चीनी मिलों में पेराई शुरू होने से पहले किसानों को उनके गन्ने का पुराना 10,000 करोड़ रुपये का पूरा बकाया चुका दिया जाए.
उन्होंने कहा कि आने वाले हफ़्ते में सहकारी और निजी क्षेत्र की मिलों पर गन्ने की बकाया राशि का निपटान करने के लिए 5,535 करोड़ रुपये की मदद का पैकेज मंत्रिमंडल के समक्ष पेश किया जाएगा.
सुरेश राणा ने नेशनल फ़ेडरेशन ऑफ़ शुगर फ़ैक्टरीज़ लिमिटेड (एनएफएसएफएल) की वार्षिक आम बैठक के मौके पर ये बात कही.
उन्होंने बताया, "हमने 20 अक्टूबर से नए सत्र की शुरुआत से पहले बकाया राशि को शून्य करने का लक्ष्य रखा है."में दी गई ख़बर के मुता​बिक सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुजरात के पूर्व एटीएस प्रमुख डीजी वंजारा समेत पांच लोगों को बरी कर दिया है.
हाई कोर्ट ने सोमवार को अभियुक्तों को आरोपमुक्त करने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए इसे चुनौती देने वाली याचिका ख़ारिज कर दी.
गुजरात की एक निचली अदालत ने डीजी वंजारा समेत चार पुलिस अधिकारियों को आरोपमुक्त कर दिया था. तब सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन ने इसके ख़िलाफ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. की ख़बर के मुताबिक दिल्ली सरकार ने सोमवार को 'डोर स्टेप डिलीवरी' योजना की शुरुआत की.
इसके ​जरिए अब लोगों को 40 सेवाओं की घर बैठे सुविधा मिल सकेगी. सरकार का कहना है तीन महीने बाद इसके जरिए 100 तरह की सुविधाएं मिलने लगेंगी.
योजना की शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री अ​रविंद केजरीवाल ने कहा कि अब पिज्जा की तरह सरकारी सुविधाओं की भी डिलिवरी होगी.
इन सेवाओं के लिए आवेदक सुबह आठ से रात दस बजे तक 1076 नंबर पर फ़ोन कर सकते हैं. आवेदक की सुविधा के अनुसार मोबाइल सहायक मिलने के लिए समय तय करेगा. फिर वह घर आकर फॉर्म भरवाएगा और प्र​क्रिया पूरी होने के बाद 50 रूपये का शुल्क लेगा.
बाद में प्रमाणपत्र पोस्ट के जरिए आवेदक के पास पहुंचेगा.में पहले पन्ने पर पीएनबी घोटाले के मामले में मुख्य अभियुक्त नीरव मोदी से जुड़ी ख़बर दी गई है.
इस ख़बर के अनुसार इंटरपोल ने आभूषण व्यापारी नीरव मोदी की बहन और बेल्जियम की नागरिक पूर्वी मोदी के ख़िलाफ़ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है.
अधिकारियों ने सोमवार को इसकी जानकारी दी. रेड कॉर्नर नोटिस में कहा गया है कि 'धनशोधन' के आरोपों में पूर्वी दीपक मोदी की तलाश की जा रही है.
प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि पूर्वी मोदी कई छद्म निवेश कंपनियों की मालिक भी हैं. यारह सितंबर 1893 को शिकागो में हुए विश्व धर्म संसद में विवेकानंद के भाषण की याद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भी शिकागो में ही आठ सितंबर को एक भाषण दिया है.
11 सितंबर की जगह आठ सितंबर क्योंकि सप्ताहांत न हो तो काम छोड़कर अमरीका में भाषण सुनने लोग नहीं आते, और विश्व धर्म संसद की जगह विश्व हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया. आप मोहन भागवत के अंग्रेज़ी में दिए गए 41 मिनट का भाषण सुनेंगे तो आपको समझ में आएगा कि उन्होंने विवेकानंद से कोई प्रेरणा नहीं ली है.
पूरे भाषण के दौरान अमरीकी झंडा बैकग्राउंड में था, वहां न तो कोई भगवा ध्वज था, न ही तिरंगा.
बहरहाल, उन्होंने कई बातें कहीं जिन पर ग़ौर किया जाना चाहिए क्योंकि वो मामूली व्यक्ति नहीं हैं, संसार के सबसे बड़े एनजीओ के प्रमुख हैं जिसे भारत की मौजूदा सरकार अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश करती है क्योंकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भाजपा की 'मातृसंस्था' है.
मोहन भागवत ने कहा कि भारत में हमेशा से समस्त संसार का ज्ञान रहा है, भारत के आम लोग भी इन बातों को समझते हैं. इसके बाद उन्होंने एक दिलचस्प सवाल पूछा, "फिर क्या ग़लत हो गया, हम हज़ार साल से मुसीबत क्यों झेल रहे हैं?" इसका जवाब उन्होंने दिया कि ऐसा इसलिए हुआ कि 'हमने अपने आध्यात्मिक ज्ञान के मुताबिक जीना छोड़ दिया.'
ग़ौर करिए कि उन्होंने हज़ार साल की मुसीबत क्यों कहा? संघ का मानना है कि भारत के दुर्दिन अंग्रेज़ी राज से नहीं बल्कि मुसलमानों के हमलों से शुरू हुए, मुग़ल काल को भी वे मुसीबत का दौर मानते हैं.
दरअसल, ऐसे मौक़े याद नहीं आते जब संघ ने अंग्रेज़ी हुकूमत की आलोचना की हो, न अतीत में, न वर्तमान में. आलोचना के मामले में मुग़ल उनके प्रिय रहे हैं.
इसके बाद उन्होंने एक और दिलचस्प बात कही, "आज की तारीख़ में हिंदू समाज दुनिया का ऐसा समाज है जिसमें हर क्षेत्र के मेधावी लोग सबसे अधिक संख्या में मौजूद हैं." न जाने उन्होंने यह निष्कर्ष किस आधार पर निकाला कि हिंदू, अपने हिंदू होने की वजह से यहूदियों, ईसाइयों या मुसलमानों से अधिक प्रतिभाशाली हैं?
यह हिंदू गौरव को जगाने की उनकी कोशिश थी, इसके फ़ौरन बाद उन्होंने कहा कि हिंदू एकजुट होकर काम नहीं करते, यही उनकी सबसे बड़ी समस्या है. उन्होंने एक किस्सा सुनाया कि एकजुट होने के आह्वान पर हिंदू कहते रहे हैं कि "शेर कभी झुंड में नहीं चलते."
उन्होंने कहा, "जंगल का राजा, रॉयल बंगाल टाइगर भी अगर अकेला हो तो जंगली कुत्ते उसे घेरकर, हमला करके मार दे सकते हैं." उनके ऐसा कहते ही हॉल तालियों से गूंज उठा, उन्हें कहने-बताने की ज़रूरत नहीं पड़ी कि वे जंगली कुत्ते किसको कह रहे हैं. ये वही कुत्ते हैं जिनके पिल्ले गाड़ी के नीचे आ जाएं तो प्रधानमंत्री मोदी जी को दुख होता है.
"हिंदू होने पर गर्व करना चाहिए", "हिंदू ख़तरे में हैं" और "हिंदुओं को एकजुट होना चाहिए"... ये सब संघ का स्थायी भाव है. हिंदुओं को किससे ख़तरा है? हिंदुओं को किस लक्ष्य के लिए एकजुट होना चाहिए, किसके ख़िलाफ़ एकजुट होना चाहिए, इन सवालों के जवाब इशारों में समझाए जाते हैं, चुनाव जैसी विकट स्थितियों में ही मंच से क़ब्रिस्तान-श्मशान कहना पड़ता है.